चार्टर एक्ट, 1786-1853.

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1786 का एक्ट -
1786 के एक्ट में यह व्यवस्था की गयी कि गवर्नर जनरल अपनी परिषद के बहुमत के बावजूद भी निर्णय ले सकेगा ! 1786 के एक्ट द्वारा गवर्नर जनरल एवं मुख्य सेनापति पद को मिला दिया गया। इस अधिनियम के तहत सर्वप्रथम कार्नवालिस की नियुक्ति की गयी थी! 

1793 का चार्टर एक्ट -
सर्वप्रथम कंपनी के व्यापारिक अधिकारों को 1793 ई. के चार्टर एक्ट द्वारा अगले 20 वर्षों के लिए बढ़ाया गया ! बोर्ड ऑफ कंट्रोल के सदस्यों तथा कर्मचारियों के वेतन भारतीय राजस्व से दिये जाने की व्यवस्था इसी एक्ट द्वारा की गयी ! 1793 के चार्टर अधिनियम द्वारा मद्रास, कलकत्ता एवं बम्बई महानगरों के लिए नगर निगम के गठन की व्यवस्था की गयी! 

1813 ई. का चार्टर एक्ट- 
1813 के चार्टर एक्ट अधिनियम द्वारा सर्वप्रथम भारतीय प्रदेशों पर क्राउन की प्रभुसत्ता का दावा किया गया तथा इस एक्ट ने भारत के निवासियों के लिए साहित्य एवं विज्ञान का प्रसार करने के लिए प्रतिवर्ष 1 लाख रुपये खर्च करने का प्रावधान किया गया! ईसाई धर्म के प्रचारकों (मिशनरियों) को भारत आने और अपने धर्म के प्रचार की सुविधा प्रदान की गयी! कंपनी के व्यापारिक एकाधिकार को समाप्त कर दिया गया तथा सभी ब्रिटिश नागरिकों को भारत के साथ व्यापार करने की अनुमति प्रदान की गयी! कंपनी के व्यापारिक एकाधिकार को 1813 ई. के चार्टर एक्ट द्वारा समाप्त कर दिया गया था, परंतु चाय एवं चीनी के व्यापार पर उसका एकाधिकार बना रहा ! कंपनी के सैनिक और असैनिक कर्मचारियों के प्रशिक्षण की व्यवस्था हेलवरी कॉलेज एवं एडिस्कोम्ब स्कूल में की गयी!  

1833 ई. का चार्टर एक्ट- 
कंपनी द्वारा चीन के साथ व्यापार और चाय के व्यापार का एकाधिकार समाप्त कर निःशुल्क व्यापार को भारत में लागू किया गया ! इस एक्ट के द्वारा कंपनी व्यापारिक संस्था न रहकर प्रशासनिक निकाय संस्था के रूप में जानी गयी! बंगाल के गवर्नर जनरल का भारत के गवर्नर जनरल के रूप में पुन: नामकरण किया गया। अत: इस एक्ट द्वारा भारत का प्रथम गवर्नर जनरल लॉर्ड विलियम बैंटिंक को नियुक्त किया गया ! ब्रिटिश जनता बिना लाइसेंस के भारत में भूमि इस एक्ट के द्वारा खरीद सकती थी 
1833 के चार्टर एक्ट द्वारा कोई भी भारतीय केवल धर्म, जाति, मूलवंश और वर्ण के आधार पर सरकारी सेवा के लिए अयोग्य नहीं होगा! 1833 ई. के चार्टर द्वारा गवर्नर जनरल की परिषद में एक नये सदस्य (विधि सदस्य के रूप में) की नियुक्ति की व्यवस्था की गयी। इस पद पर नियुक्ति पाने वाला प्रथम सदस्य लॉर्ड मैकाले थे बोर्ड ऑफ कंट्रोल का प्रेसीडेंट भारतीय विषयों का मंत्री होने लगा ! 1833 के चार्टर एक्ट द्वारा भारत में दास प्रथा को अवैध घोषित किया गया! 

1853 ईं. का चार्टर एक्ट- 
बंगाल के लिए लेफ्टिनेंट गवर्नर की नियुक्ति की व्यवस्था 1853 के चार्टर अधिनियम के द्वारा की गयी ! 1853 के चार्टर एक्ट के तहत भारत के लिए पृथक विधान परिषद की स्थापना की गयी। इस परिषद में सदस्यों की कुल संख्या 12 थी 1853 के चार्टर एक्ट द्वारा विधि सदस्य को परिषद का पूर्ण सदस्य बना दिया गया ! विधान परिषद द्वारा पारित विधेयकों को गवर्नर जनरल वीटो कर सकता था विधान परिषद में वाद-विवाद का प्रारूप मौखिक था। परिषद के कार्य की प्रकृति सार्वजनिक थी चार्टर एक्ट, 1853 के तहत भारतीय सिविल सेवा के अंतर्गत भारतीय अधिकारियों की नियुक्ति के लिए खुली प्रतियोगिता परीक्षा की शुरुआत हुईं ! कार्यपालिका तथा विधायी शक्तियों के पृथककरण के लिए सर्वप्रथम प्रयास प्रारम्भ किया गया ! सम्पूर्ण भारत के लिए एक विधानमंडल का प्रावधान 1853 में ( चार्टर एक्ट द्वारा ) किया गया ! 1853 के चार्टर एक्ट द्वारा सर्वप्रथम विधान परिषद में क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व के सिद्धांत को स्वीकार किया गया  ! 
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